
राजकीय इंजीनियरिंग कॉलेज में भू-गर्भ जल सप्ताह के तहत एक जन-जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। सिविल इंजीनियरिंग विभाग द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम का उद्घाटन ज्वाइंट मजिस्ट्रेट वैशाली ने दीप प्रज्ज्वलन और सरस्वती वंदना के साथ किया।
सोमवार दोपहर को हुए इस कार्यक्रम में ज्वाइंट मजिस्ट्रेट वैशाली ने जल संरक्षण को वर्तमान समय की सबसे महत्वपूर्ण आवश्यकता बताया।
उन्होंने कहा कि लगातार गिरते भू-जल स्तर को देखते हुए जल का विवेकपूर्ण उपयोग, वर्षा जल संचयन और जल स्रोतों का संरक्षण प्रत्येक नागरिक का दायित्व है।
जल संचयन को अपनाने का आह्वान
इसके बाद सिविल इंजीनियरिंग विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर ऋषभ कश्यप ने अपने संबोधन में कहा कि जल संरक्षण केवल सरकारी दायित्व नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक की सामाजिक एवं नैतिक जिम्मेदारी है। उन्होंने विद्यार्थियों से जल संरक्षण के लिए जागरूकता फैलाने और वर्षा जल संचयन को अपनाने का आह्वान किया।
लघु सिंचाई विभाग के सहायक अभियंता रामजी पटेल ने भू-गर्भ जल संरक्षण के लिए संचालित विभिन्न सरकारी योजनाओं की जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि वर्षा जल का अधिकतम संचयन ही भू-जल स्तर को बनाए रखने का सबसे प्रभावी माध्यम है।
उत्पादन की तकनीकों का उपयोग
पटेल ने जल के अंधाधुंध दोहन को रोकने और जल पुनर्भरण संरचनाओं के निर्माण पर विशेष बल दिया। उप कृषि निदेशक ने कृषि क्षेत्र में सूक्ष्म सिंचाई प्रणालियों, जैसे ड्रिप और स्प्रिंकलर, को अपनाने पर जोर दिया। उन्होंने किसानों से कम पानी में अधिक उत्पादन की तकनीकों का उपयोग करने का आग्रह किया।
कार्यक्रम का समापन राष्ट्रीय जल मिशन द्वारा जारी जल शपथ के साथ हुआ। संस्थान के निदेशक प्रो. मनोज कुमार शुक्ला ने सभी अतिथियों, अधिकारियों और प्रतिभागियों का आभार व्यक्त करते हुए धन्यवाद ज्ञापित किया।

